शुक्रवार, 30 सितंबर 2011

में परम पिता परमेश्वर की सहायता से सारे कार्य कर सकता हूँ......, क्योंकि हमेशा वही मुझे शक्ति देतें हैं ..................... ईश्वर दयालु है.......और वो हमसे बहुत प्यार करता है....... वो चाहता है की..... हम अपने अंदर उसके पवित्र प्रेम को बनायें रखें...... अपने अंदर..... अपने आप में..... और इसे जरूरतमंदों में बांटते चलें......... हीन भावना या खुद पर शंका को मिटाने का सबसे बड़ा रहस्य है की..... अपने दिल और दिमाग को विश्वास से लबालब भर लें....... ईश्वर में प्रबल आस्था विकसित करें....... प्रबल आस्था प्रार्थना से प्राप्त होती है.... चाहे वो किसी भी रूप में की जावे..........

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